ग्वार की फसल में पीलापन क्यों आता है? जानिए इसके मुख्य कारण और अचूक उपाय
ग्वार (Guar) राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के किसानों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण नकदी फसल (Cash Crop) है। कम पानी और रेतीली मिट्टी में बेहतर उत्पादन देने वाली यह फसल कभी-कभी किसानों के लिए चिंता का विषय बन जाती है। आजकल किसानों को ग्वार की खेती में एक बड़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा है, और वह है —
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ग्वार में पीलापन आने के 3 मुख्य लक्षण (Visual Symptoms)
खेत में जाकर पौधों को ध्यान से देखना सबसे जरूरी है। आमतौर पर पीलापन दो तरह से दिखाई देता है:
1. ऊपरी नई पत्तियों का पीला होना: अगर पौधे के ऊपर की नई पत्तियां पूरी तरह चमकीली पीली पड़ रही हैं और नीचे की पत्तियां हरी हैं, तो यह सीधे तौर पर सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को दर्शाता है।
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ग्वार में पीलेपन के प्रमुख कारण (Causes of Yellowing)
खेत में सही दवा का छिड़काव करने से पहले बीमारी की वजह जानना जरूरी है। ग्वार में पीलेपन के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
लोहे (Iron) और सल्फर की कमी
रेतीली और हल्की मिट्टी में अक्सर लोहा (Iron) और सल्फर जैसे माइक्रो-न्यूट्रिएंट्स की कमी हो जाती है। इसके कारण पौधे में क्लोरोफिल नहीं बन पाता और ग्वार की ऊपरी नई पत्तियां एकदम सफेद या चमकीली पीली दिखने लगती हैं।2. ग्वार का पीला मोज़ेक वायरस (Yellow Mosaic Virus)
यह ग्वार की एक खतरनाक बीमारी है। यह वायरस खुद नहीं फैलता, बल्कि इसे सफेद मक्खी (Whitefly) एक पौधे से दूसरे पौधे में फैलाती है। इसमें पत्तियों पर पीले और हरे रंग के धब्बे बनते हैं और धीरे-धीरे पूरी पत्ती पीली हो जाती है।
अगर खेत में पानी रुक जाता है या बरसात के बाद उमस बढ़ती है, तो जड़ों में फंगस (फफूंद) लग जाती है। जड़ें काली पड़कर सड़ने लगती हैं, जिससे पौधा जमीन से खुराक नहीं ले पाता और पीला होकर सूख जाता है।
कई बार किसान भाई ग्वार में कसनी या अन्य खरपतवार मारने के लिए तेज दावों का छिड़काव करते हैं। दवा की अधिक मात्रा या गलत समय पर स्प्रे करने से फसल को झटका (Stress) लगता है और पत्तियां पीली पड़ जाती हैं।
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ग्वार के पीलेपन को दूर करने के अचूक उपाय (Treatment Options)
बीमारी के लक्षण के हिसाब से नीचे दिए गए उपायों को अपनाएं:
उपाय 1: पोषक तत्वों की कमी के लिए (Micro-nutrients Spray)
अगर नई पत्तियां पीली हैं, तो समझें कि यह पोषण की कमी है। इसके लिए:
उपाय 2: सफेद मक्खी और वायरस नियंत्रण के लिए
अगर खेत में सफेद मक्खी या तेला दिखाई दे रहा है, तो रस चूसने वाले कीटों को तुरंत मारना जरूरी है:
उपाय 3: फंगस और जड़ गलन के लिए (Fungicide Spray)
अगर जड़ों या तने में दिक्कत है या पीली पत्ती रोग का फंगस है:
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किसान भाइयों के लिए विशेष सावधानी और टिप्स
• जल निकासी: ग्वार की फसल ज्यादा पानी बर्दाश्त नहीं कर सकती। यदि खेत में बारिश का पानी जमा है, तो उसे तुरंत बाहर निकालें।
ग्वार में पीलापन आने पर घबराने की जरूरत नहीं है। बस जरूरत है सही समय पर सही कारण को पहचानकर उपचार करने की। अगर समस्या शुरुआती स्तर पर है, तो पोषक तत्वों और एक अच्छे फंगीसाइड का कॉम्बो स्प्रे आपकी फसल को 4 से 5 दिनों में दोबारा हरा-भरा बना सकता है।
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कृषि सलाह: किसी भी रासायनिक दवा या खाद का उपयोग करने से पहले अपने नजदीकी कृषि पर्यवेक्षक (Agriculture Supervisor) या प्रमाणित कृषि सेवा केंद्र के विशेषज्ञ से अपनी मिट्टी और फसल की स्थिति के अनुसार खुराक (Dose) की पुष्टि अवश्य कर लें।
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