खास रिपोर्ट: इस बार अगस्त के चिपचिपे मौसम के कारण कपास में सफेद मक्खी का प्रकोप तेजी से बढ़ा है।
1. नमस्कार किसान भाइयों - ताजा सर्वे रिपोर्ट क्या कहती है?सभी किसान भाइयों को नमस्कार।
जैसा कि आप जानते हैं, कपास की फसल का फील्ड सर्वे सर्वे में से ज्यादातर लोकेशन पर सफेद मक्खी (जिसे कई किसान धोला मच्छर भी कहते हैं) की समस्या आर्थिक क्षति स्तर (ETL - Economic Threshold Level) से ऊपर पाई गई।
ETL का मतलब है - अब अगर आपने नियंत्रण नहीं किया तो सीधा-सीधा पैदावार पर नुकसान होगा। इसलिए यह लेख हर कपास किसान के लिए बहुत जरूरी है।
2. सफेद मक्खी का प्रकोप क्यों बढ़ता है?
सफेद मक्खी एक मौसम-आधारित कीट है।
अनुकूल मौसम: अगस्त के पहले पखवाड़े, यानी 15 अगस्त तक जैसा मौसम रहता है - हल्की-फुल्की बारिश, कई जगह अच्छी बारिश और हवा में ज्यादा नमी। ऐसा चिपचिपा मौसम सफेद मक्खी के लिए सबसे अनुकूल होता है। इस मौसम में इसकी बढ़ोतरी 10 गुना तेजी से होती है।
3. पहचान कैसे करें? आपके खेत में सफेद मक्खी है या नहीं?
कई किसान भाई ऊपर-ऊपर से देखते हैं और धोखा खा जाते हैं। इसकी सही पहचान का तरीका यह है:
3.1. पत्तियों की निचली सतह देखें - सबसे पक्का तरीका
सफेद मक्खी के वयस्क और उसके पीले रंग के छोटे-छोटे शिशु (Nymphs) और अंडे हमेशा पत्ती की निचली सतह पर चिपके हुए मिलेंगे। पौधे को हिलाने पर सफेद मच्छरों जैसा झुंड उड़ता हुआ दिखेगा। ये वहीं से पौधे का रस चूसते रहते हैं।
3.2. चिपचिपापन (Honeydew) - दूसरा बड़ा लक्षण
ये कीट रस चूसने के बाद एक मीठा, चिपचिपा पदार्थ मल के रूप में नीचे वाली पत्तियों पर गिराते रहते हैं। इसे Honeydew कहते हैं। अगर पत्तियों पर हाथ लगाने से चिपचिपापन महसूस हो रहा है, तो यह कन्फर्म है।
3.3. पत्तियों का काला पड़ना (Sooty Mould) - तीसरा और खतरनाक लक्षण
यह सबसे खतरनाक स्टेज है। उसी चिपचिपे पदार्थ पर कुछ दिनों बाद काली फफूंद लग जाती है। पत्ते पूरी तरह काले-काले दिखने लगते हैं। इससे पौधा भोजन बनाना बंद कर देता है और टिंडे झड़ने लगते हैं।
अगर आपके खेत में ये 3 लक्षण दिख रहे हैं तो तुरंत स्प्रे की जरूरत है।
4. सबसे बड़ी गलती: इन कीटनाशकों से बिल्कुल बचें
यह जानकारी नोट कर लें, नहीं तो नुकसान दोगुना हो जाएगा।
HIGHLIGHT / चेतावनी: 15 सितंबर से पहले कभी भी Synthetic Pyrethroid ग्रुप के कीटनाशकों का प्रयोग न करें।
किसान भाई अक्सर जल्दबाजी में इस ग्रुप की दवाएं डाल देते हैं। इससे एक बार तो सफेद मक्खी मरी हुई दिखती है, लेकिन ये दवाएं सफेद मक्खी के दुश्मन कीट (मित्र कीट) को मार देती हैं। इसके बाद सफेद मक्खी पहले से 20 गुना तेजी से वापस आती है। यह हमारे सर्वे में भी देखा गया है।
5. सफेद मक्खी का पक्का नियंत्रण - 2 स्प्रे की रणनीति
सफेद मक्खी को एक स्प्रे से कंट्रोल करना मुश्किल है, क्योंकि वयस्क और शिशु दोनों एक साथ होते हैं। इसलिए वैज्ञानिक तरीका है - पहला स्प्रे वयस्क के लिए और दूसरा स्प्रे अंडे-बच्चों के लिए।
5.1. पहला स्प्रे: वयस्क (Adult) सफेद मक्खी को मारने के लिए
इसका उद्देश्य उड़ने वाली मक्खी को तुरंत खत्म करना है। इसके लिए बाजार में ये प्रभावी विकल्प हैं:
• Diafenthiuron 50% WP: 200 ग्राम प्रति एकड़ • Dinotefuran 20% SG: 60 से 80 ग्राम प्रति एकड़ • Pyriproxyfen 10% EC + Diafenthiuron का Combination: 400 मिली प्रति एकड़
कैसे छिड़काव करें: ऊपर बताई गई किसी एक दवा को 200 से 250 लीटर साफ पानी में प्रति एकड़ के हिसाब से अच्छी तरह घोल बनाकर छिड़काव करें। ध्यान रहे, दवा पत्तियों की निचली सतह पर जरूर पहुंचे।
5.2. दूसरा स्प्रे: अंडे और शिशु (Nymphs) को खत्म करने के लिए
पहले स्प्रे के 5-7 दिन बाद, पत्तियों के नीचे देखें। अगर छोटे-छोटे पीले अंडे और शिशु अभी भी दिख रहे हैं, तो यह स्प्रे जरूरी है। इसके लिए Insect Growth Regulator (IGR) ग्रुप सबसे अच्छा है। ये शिशुओं की बढ़ोतरी को रोक देते हैं।
• Pyriproxyfen 10% EC: 400 से 500 मिली प्रति एकड़ • Spiromesifen 22.9% SC: 240 मिली प्रति एकड़ • Buprofezin 25% SC: 400 मिली प्रति एकड़
इसका भी 200-250 लीटर पानी प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे करें।
6. भविष्य में बचाव के लिए 3 अतिरिक्त उपाय 1. पीले स्टिकी ट्रैप: खेत में 15-20 पीले चिपचिपे ट्रैप प्रति एकड़ लगाएं। इससे आपको पता चलता रहेगा कि मक्खी कितनी है। 2. खेत की साफ-सफाई: खेत के आस-पास की खरपतवार, खासकर कांग्रेस घास को खत्म करें, यह सफेद मक्खी का घर है। 3. तेज धार से पानी: अगर प्रकोप कम है तो सिर्फ तेज धार से पानी का छिड़काव भी कई शिशुओं को नीचे गिरा देता है। 7. अंतिम सलाह किसान भाइयों के लिए
किसान भाइयों, दवा हमेशा शाम के समय (4 बजे के बाद) ही छिड़कें, जब मक्खी पत्तियों पर बैठी होती है। एक ही दवा को बार-बार न दोहराएं।
जरूरी डिस्क्लेमर: यहाँ बताई गई दवाओं की मात्रा एक सामान्य जानकारी है। दवा खरीदने से पहले अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), कृषि विभाग या कृषि विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें और दवा के लेबल पर लिखे निर्देशों का पालन करें।
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