Wednesday, 19 August 2026

धान में कल्ले कैसे बढ़ाएं और रोगों से रक्षा: जानिए बंपर पैदावार के वैज्ञानिक तरीके

 किसान भाइयों, उत्तर भारत में धान की फसल इस समय बहुत ही महत्वपूर्ण अवस्था में है। इस समय यदि फसल की सही देखभाल न की जाए, तो पैदावार में भारी कमी आ सकती है। आज के इस लेख में हम जानेंगे कि धान में कल्ले (Tillers) कैसे बढ़ाएं और फसल को विभिन्न रोगों व कीटों से कैसे बचाएं।

धान में कल्ले बढ़ाने के उपाय


धान की फसल में जितने ज्यादा कल्ले निकलेंगे, बालियां उतनी ही अधिक बनेंगी और पैदावार भी बंपर होगी। कल्ले बढ़ाने के लिए नीचे दिए गए तरीकों को अपनाएं:


• यूरिया की सही मात्रा और टॉप-ड्रेसिंग

धान की रोपाई के 20 से 40 दिनों के भीतर यूरिया का उपयोग बहुत जरूरी है। प्रति एकड़ 30 से 40 किलोग्राम यूरिया का छिड़काव करें।
जिंक सल्फेट के फायदे: यदि पत्तियों का रंग हल्का पीला या भूरा हो रहा है, तो यूरिया के साथ 5 किलोग्राम जिंक सल्फेट (33%) प्रति एकड़ जरूर मिलाएं।

ग्रोथ प्रमोटर का उपयोग: कल्लों की संख्या तेजी से बढ़ाने के लिए आप इफको की सागरिका (Sagarika) या बायोविटा दानेदार की 8 से 10 किलोग्राम मात्रा प्रति एकड़ डाल सकते हैं


धान के प्रमुख रोग और उनका इलाज

अगस्त और सितंबर के महीनों में हवा में नमी होने के कारण धान में बीमारियों का खतरा सबसे ज्यादा होता है।


धान का बाकानी रोग और इसका सटीक इलाज



धान का बाकानी रोग, जिसे किसान भाई 'पैर सड़न रोग' या 'लम्बा होने वाला रोग' भी कहते हैं, एक फंगस के कारण फैलता है। इस रोग में धान के पौधे अचानक सामान्य से बहुत ज्यादा लम्बे और पतले हो जाते हैं, और बाद में पीले पड़कर सूख जाते हैं।


• उपचार: खेत में लक्षण दिखते ही प्रभावित पौधों को जड़ से उखाड़कर नष्ट कर दें। इसके बाद कार्बेन्डाजिम 50% डब्ल्यूपी (Carbendazim 50% WP) की 250 ग्राम मात्रा को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें।

धान में हल्दी रोग (False Smut) की रोकथाम )


इसे कंडुआ या लक्ष्मी रोग भी कहा जाता है। इसमें धान की बालियों के दानों पर पीले-हरे रंग के पाउडर के गोले बन जाते हैं।
• उपचार: बालियां निकलने (गोभ की अवस्था) से ठीक पहले कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50% डब्ल्यूपी की 500 ग्राम मात्रा का प्रति एकड़ स्प्रे करें।


धान में तना छेदक (Stem Borer) कीट का नियंत्रण


यह कीट धान के तने के भीतर घुसकर उसे अंदर से कुतर देता है, जिससे पौधे की मुख्य गोभ सूख जाती है और बालियां सफेद निकलती हैं (जिसे सफेद बाली या डेड हार्ट कहते हैं)।
• उपचार (दानेदार दवा): यदि शुरुआती लक्षण दिखें, तो फर्टेरा (Chlorantraniliprole 0.4% G) की 4 किलोग्राम मात्रा को प्रति एकड़ यूरिया में मिलाकर खेत में डालें।उपचार (स्प्रे दवा): प्रकोप ज्यादा होने पर कोराजन (Chlorantraniliprole 18.5% SC) की 60 मिलीलीटर मात्रा को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ समान रूप से स्प्रे करें।

निष्कर्ष
किसान भाइयों, धान की फसल में समय पर यूरिया, जिंक और सही कीटनाशकों का प्रयोग करके आप अपनी लागत कम कर सकते हैं और बंपर पैदावार ले सकते हैं। अपने खेतों की नियमित निगरानी करें और बीमारी के लक्षण दिखते ही सही कदम उठाएं।

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