Tuesday, 1 September 2026

सालभर हरा चारा, पशु रहेंगे तंदुरुस्त और दूध बहेगा दुगना! जानिए उन्नत चारे की खेती और सरकारी सब्सिडी

 सालभर हरा चारा, पशु रहेंगे तंदुरुस्त और दूध बहेगा दुगना! जानिए उन्नत चारे की खेती और सरकारी सब्सिडी





किसान भाइयों, राम-राम!

पशुपालन और खेती हमारे जीवन के दो सबसे मजबूत स्तंभ हैं। लेकिन आज के समय में पशुओं को पालने में सबसे बड़ी समस्या आती है—
बढ़ती लागत और दूध का कम होना। बाजार का महंगा दाना-चोकर खरीदने में ही हमारी आधी कमाई निकल जाती है।
इस समस्या का एकमात्र और सबसे सस्ता समाधान है—
पौष्टिक हरा चारा। अगर पशु को सही मात्रा में हरा चारा मिले, तो दूध का उत्पादन अपने आप बढ़ जाता है और पशु बार-बार बीमार भी नहीं पड़ता।
आइए जानते हैं कि हम अपने खेतों में किस मौसम में कौन सा चारा उगाकर साल के 365 दिन हरे चारे का इंतजाम कर सकते हैं और इस पर सरकार से क्या मदद ले सकते हैं।

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1. मौसम के अनुसार हरे चारे की उन्नत फसलें


एक सफल डेयरी फार्मर बनने के लिए साल के 12 महीने हरे चारे की उपलब्धता जरूरी है। इसके लिए आप मौसम के अनुसार इन फसलों का चयन कर सकते हैं:

क) सर्दियों का वरदान (अक्टूबर से मार्च)

सर्दियों के मौसम में आपके पास चारे के सबसे बेहतरीन विकल्प होते हैं, जो पशुओं के शरीर में पोषण बनाए रखते हैं:

• बरसीम (चारे का राजा): यह सर्दियों का सबसे लोकप्रिय चारा है। इसे बोने के बाद आप 4 से 5 बार कटाई कर सकते हैं। यह दूध देने वाले पशुओं के लिए अमृत समान है क्योंकि इसमें प्रोटीन की मात्रा बहुत ज्यादा होती है।

जई (Oats): अगर आपके पास पानी की थोड़ी कमी है, तो जई सबसे बढ़िया विकल्प है। यह पशुओं को बहुत स्वादिष्ट लगती है और इसे खाने से पशुओं में ताकत आती है।

रिजका (Alfalfa): यह एक बार बोने पर कई सालों तक चलता है। जिन किसान भाइयों के पास कम जमीन है, वे रिजका लगाकर लंबे समय तक हरा चारा ले सकते हैं।

ख) गर्मी और बरसात का सहारा (अप्रैल से सितंबर)

गर्मियों में जब सूखा पड़ता है, तब हरे चारे की किल्लत सबसे ज्यादा होती है। ऐसे समय में ये फसलें काम आती हैं:
• मक्का: गर्मियों में दुधारू पशुओं के लिए मक्का से अच्छा कुछ नहीं। मक्का का चारा खाने से पशुओं के दूध में फैट (मलाई) बढ़ता है।
ज्वार (चरी): कम पानी और तेज धूप में भी ज्वार की फसल शान से खड़ी रहती है। इसकी मल्टी-कट (बार-बार कटने वाली) किस्मों से एक ही बुआई में बार-बार चारा मिलता है।

लोबिया (रवां): इसे हमेशा मक्का या ज्वार के साथ मिलाकर बोना चाहिए। यह चारे की ताकत को दोगुना कर देती है।
ग) हर साल की झंझट खत्म: 'सुपर नेपियर घास'
अगर आप हर मौसम में बार-बार बुआई, जुताई और बीज के खर्चे से बचना चाहते हैं, तो अपने खेत के एक हिस्से या मेड़ पर सुपर नेपियर घास लगा दें।
• इसकी खासियत यह है कि इसे एक बार लगाने के बाद यह 4 से 5 साल तक लगातार बढ़ती रहती है।इसकी कटाई हर 45 से 50 दिनों में की जा सकती है। यह बहुत तेजी से फैलती है और इसमें वजन बहुत ज्यादा निकलता है।

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2. हरे चारे की खेती और बिजनेस पर सरकारी सब्सिडी (Government Subsidy)

भारत सरकार और राज्य सरकारों द्वारा किसानों को हरे चारे की खेती और इसके बिजनेस (मूल्य संवर्धन) पर भारी अनुदान (Subsidy) दिया जा रहा है। आप राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) के तहत इसका लाभ उठा सकते हैं:

क) चारे की मशीनरी और यूनिट्स पर 50% सब्सिडी

यदि कोई किसान, उद्यमी या स्वयं सहायता समूह (SHG) चारे को लंबे समय तक सुरक्षित रखने वाली यूनिट लगाता है, तो सरकार 50% तक कैपिटल सब्सिडी देती है:
• साइलेज मेकिंग यूनिट (Silage Unit): हरा चारा सुरक्षित रखने के लिए, अधिकतम ₹50 लाख तक की सब्सिडी।

हे बेलिंग यूनिट (Hay Bailing Unit): चारे के बंडल (गट्ठे) बनाने वाली मशीनरी के लिए, अधिकतम ₹50 लाख तक की सब्सिडी।
फॉडर ब्लॉक यूनिट (Fodder Block Unit): चारे के ब्लॉक बनाने के लिए, अधिकतम ₹50 लाख तक की सब्सिडी।नोट: इसके लिए आप सरकार के आधिकारिक पोर्टल nlm.udyamimitra.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

ख) उन्नत बीजों पर 60% से 75% तक की छूट

• सीड विलेज प्रोग्राम: इस योजना के तहत किसानों को अनाज और चारा फसलों के उन्नत व प्रमाणित बीजों पर 60% तक की सब्सिडी दी जाती है।
फीड एंड फॉडर उप-मिशन: इसके तहत कई राज्यों में प्रमाणित चारा बीज उत्पादन करने पर किसानों को मुफ़्त बीज किट बांटे जाते हैं, जिसका 75% तक लाभ सीधे किसानों को मिलता है।

ग) कृषि यंत्रों और सिंचाई पर सहायता

• चैफ कटर (कुट्टी काटने की मशीन): हाथ से चलने वाले या बिजली वाले चैफ कटर (कुट्टी मशीन) पर 40% से 50% तक की सब्सिडी मिलती है।पाइप और स्प्रिंकलर (सिंचाई): प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत चारे की फसलों में पानी के छिड़काव (Fountain/Sprinkler system) के लिए 60% से 80% तक का अनुदान मिलता है।

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3. किसान भाइयों के लिए कमाई बढ़ाने वाले 3 गुरुमंत्र

1. मिक्स करके बोएं: खेत में सिर्फ ज्वार या मक्का न बोएं। हमेशा अनाज वाले चारे के साथ थोड़ा दलहनी चारा (जैसे लोबिया या बरसीम) मिलाकर बोएं। इससे पशु का पेट भी साफ रहेगा और दूध भी बढ़ेगा।

सही समय पर काटें: चारे को बहुत ज्यादा पकने न दें। जब चारे की फसल पर फूल आने वाले हों (लगभग 50% फूल दिखने पर), तभी कटाई कर लें। इस समय चारा सबसे ज्यादा मुलायम और पौष्टिक होता है।
सूखे के दिनों की तैयारी (साइलेज): जब आपके पास खेत में जरूरत से ज्यादा चारा हो, तो उसका साइलेज (चारे का अचार) बना लें। यह चारा तब काम आएगा जब मई-जून की कड़कती धूप में बाहर घास का एक तिनका भी नहीं मिलता।
निष्कर्ष

किसान भाइयों, केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहने के बजाय अपने खेत के एक छोटे से हिस्से में उन्नत चारे की खेती शुरू करें। सरकारी योजनाओं और सब्सिडी का लाभ उठाकर आप अपनी लागत को आधा कर सकते हैं। अच्छा चारा खाकर जब आपकी गाय-भैंस खुश रहेंगी, तो आपका डेयरी का मुनाफा अपने आप दोगुना हो जाएगा।


❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

सवाल 1: हरे चारे की कटाई का सबसे सही समय क्या है?
जवाब: हरे चारे की कटाई हमेशा फसल पर 50% फूल आने की अवस्था (फूल आने से ठीक पहले) पर करनी चाहिए। इस समय चारे में प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व सबसे अधिक मात्रा में होते हैं, और रेशा (फाइबर) कम होता है, जिससे यह पशुओं के लिए बेहद पाचक होता है।

सवाल 2: सुपर नेपियर घास की बुआई का सबसे अच्छा महीना कौन सा है?
जवाब: सुपर नेपियर घास की बुआई के लिए फरवरी से जुलाई का महीना सबसे उत्तम माना जाता है। तेज ठंड के दिनों (दिसंबर-जनवरी) में इसे लगाने से बचना चाहिए क्योंकि उस समय इसकी ग्रोथ रुक जाती है।

सवाल 3: राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) के तहत चारे की मशीनरी पर सब्सिडी के लिए कौन आवेदन कर सकता है?
जवाब: इस योजना के तहत व्यक्तिगत किसान, स्वयं सहायता समूह (SHG), किसान उत्पादक संगठन (FPO), संयुक्त देयता समूह (JLG) और कृषि से जुड़े उद्यमी ऑनलाइन पोर्टल nlm.udyamimitra.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं [dahd.gov.in]।

सवाल 4: दुधारू पशुओं के लिए अनाज और दलहनी चारे का सही मिश्रण क्या होना चाहिए?
जवाब: पशुओं के संतुलित आहार के लिए हमेशा 3 भाग अनाज वाले चारे (जैसे मक्का या ज्वार) के साथ 1 भाग दलहनी चारे (जैसे लोबिया या बरसीम) को मिलाकर खिलाना चाहिए। इससे पशुओं को कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन दोनों सही मात्रा में मिलते हैं।

सवाल 5: साइलेज (चारे का अचार) कितने दिनों में बनकर तैयार हो जाता है और यह कितने समय तक खराब नहीं होता?
जवाब: हरे चारे को गड्ढे या साइलो पिट में दबाने के बाद यह 45 से 50 दिनों में पूरी तरह तैयार हो जाता है। यदि हवा और पानी से इसे अच्छी तरह बचाकर रखा जाए, तो यह साइलेज 2 से 3 साल तक सुरक्षित रहता है और खराब नहीं होता।



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